What is Pregnancy in Hindi

जानिए गर्भावस्था क्या है? What is Pregnancy in Hindi?

What is Pregnancy in Hindi- दोस्तों, आज हम बात करेंगे गर्भावस्था की जो कि एक महिला के लिए उसके जीवन में एक बहुत ही महत्वपूर्ण यात्रा होती है। जो उसको और उसके परिवार को खुशी देने का अवसर प्रदान करती है। लेकिन दोस्तों, महिलाओं के लिए यह सफर बहुत ही नाजुक होता है। उन्हें इस अवस्था में बहुत कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ता है। जरा सी लापरवाही महिला और उसके बच्चे के लिए खतरनाक हो सकती है। गर्भावस्था के समय ही मां को अपने बच्चे के अच्छे विकास के लिए बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए। गर्भावस्था में मां को सही पोषण देने से ही भविष्य में आने वाला बच्चा कई बीमारियों से दूर रहता है। आज हम अपने लेख में ऐसी ही कुछ बातों को लेकर आए हैं। जिन्हें गर्भावस्था में महिलाओं को विशेष तौर पर ध्यान रखने की जरूरत है। तो आइए दोस्तों, जानते हैं गर्भावस्था के विषय में।

Pregnancy in Hindi

What is Pregnancy in Hindi

गर्भावस्था (Pregnancy in Hindi) एक ऐसा शब्द है जो केवल महिलाओं को ही नहीं, पूरे परिवार को ख़ुशी देता है। गर्भावस्था क्या है (Garbhavastha Kya Hai) यह एक महिला से बेहतर और कोई नहीं समझ सकता है।

गर्भावस्था क्या है? (What is Pregnancy in Hindi?)

गर्भावस्था को समझे तो मतलब होगा गर्भ की अवस्था, इस अवधि के लिए महिला के गर्भ में एक शुक्राणु और अंडा मिलकर भ्रूण बनाते है जिससे गर्भावस्था की शुरुआत होती है। धीरे-धीरे भ्रूण एक शिशु का रूप ले लेता है।

जो महिला पहली बार माँ बनने वाली होती है, उन्हें ज्ञात नहीं होता की किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए और क्या-क्या करना चाहिए। कई महिलाओं की तो यह दुविधा भी होती है कि वह प्रेगेंट है या नहीं? प्रेगनेंसी में क्या होता है (Pregnancy Me Kya Hota Hai)? ऐसे ही ना जाने कितने सवालों के जवाब को ढूंढ़ती हैं, उन्ही सब सवालों के जवाब इस आर्टिकल में मौजूद है।

कोई महिला गर्भवती हैं या नहीं, यह जानने का सबसे सही तरीका प्रेग्नेंसी टेस्ट ही है। लेकिन पीरियड्स ना होने से पहले कुछ सामान्य लक्षणों का दिखना गर्भावस्था के पहले संकेत हो सकते हैं।

गर्भावस्था के लक्षण (Pregnancy Symptoms in Hindi)

What is Pregnancy in Hindi
What is Pregnancy in Hindi
  1. पीरियड्स

गर्भावस्था का सबसे महत्वपूर्ण लक्षण पीरियड्स का रुक जाना होता है। क्योंकि जब महिला के शरीर के गर्भाशय में अंडा और पुरुष का शुक्राणु मिलकर एक भ्रूण निर्माण करते हैं। जिससे महिला की महावारी रुक जाती है। जिससे उसे अपने गर्भवती होने की आशंका होती है।

  1. कमजोरी और थकान महसूस होना

गर्भपात गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में महिला को कमजोरी व थकान महसूस होने लगती है। वह अपने आप को कमजोर महसूस करने लगती है। घर के छोटे-छोटे कामों में थकने का अहसास होने लगता है। यह सब उसके शरीर में हार्मोन्स के बदलाव के कारण होता है।

  1. उल्टी और मतली का होना

गर्भावस्था में महिला के शरीर में काफी बदलाव होते हैं। महिलाओं को दूसरे से चौथे महीने तक उल्टी की शिकायत रहती है। यह गर्भावस्था में आम समस्या है। गर्भावस्था के समय अधिकतर उल्टी सुबह के समय होती है। महिला का मन उल्टी की वजह से खराब रहने लगता है, बार-बार उल्टी होने की वजह से भी उसे कमजोरी आ जाती है। इसलिए महिलाओं को कुछ ना कुछ खाती रहना चाहिए।

  1. चक्कर आना और जी घबराना

महिलाओं को कमजोरी की वजह से चक्कर आने लगते हैं। और उल्टी की वजह से उनका जी घबराने लगता है। इसलिए इस समय महिला को आराम करना चाहिए।

  1. बार बार पेशाब जाना।

गर्भावस्था में महिलाएं बार-बार पेशाब के लिए जाती है। क्योंकि उनके शरीर में हो रहे बदलाव और गर्भाशय का आकार बढ़ने से मूत्राशय पर दबाव पड़ता है। इसलिए महिलाएं बार-बार पेशाब के लिए जाते हैं।

  1. खाने के प्रति अरुचि होना।

गर्भावस्था में महिलाओं को खाने के प्रति अरुचि सी होने लगती है। उनका कुछ खाने का मन नहीं करता उनके मुंह का स्वाद बदल जाता है। कुछ वस्तुएं जो उन्हे पहले अच्छी नहीं लगती थी वह अब खाने में अच्छी लगती है। और कुछ वस्तुएं खाने में अच्छी लगती थी वह अब नहीं लगती है।

  1. स्तनों का आकार बढ़ना

गर्भावस्था में धीरे धीरे स्तनों का आकार बढ़ने लगता है। और उन में भारीपन आने लगता है, क्योंकि उस समय शरीर बच्चे के पोषण के लिए दूध तैयार करने लगते हैं। स्तनों के निप्पल का रंग भी गहरा होने लगता है।

  1. पेट में कब्ज होना

इस समय हारमोंस के बदलाव के कारण शरीर में कब्ज होने लगती है, क्योंकि शरीर में डाइजेशन का सिस्टम धीमा पड़ जाता है। इसलिए कई महिलाओं को कब्जी की शिकायत होती है।

  1. स्वभाव का बदलना

महिलाओं में शरीर में हो रहे बदलाव के कारण उनका स्वभाव बदल जाता है। वह पल भर में खुश और पल भर में ही दुखी हो जाती हैं। कुछ महिलाओं का स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। जिसे मूड स्विंग्स कहा जाता है।

  1. सिर दर्द और पीठ दर्द

गर्भावस्था में कई महिलाओं को सिर दर्द की शिकायत रहती है। और साथ ही कमर में भी हल्का सा दर्द और ऐठन की शिकायत होती है जो गर्भावस्था में सामान्य बात है।

  1. सांस लेने में दिक्कत होना

गर्भावस्था में गर्भ का आकार बढ़ने से सांस लेने में थोड़ी दिक्कत होने लगती है। क्योंकि पेट में पल रहे भ्रूण को अधिक मात्रा में ऑक्सीजन चाहिए होता है। यह समस्या पूरी गर्भावस्था के दौरान ही बनी रहती है।

गर्भावस्था में भ्रूण का विकास

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गर्भावस्था में शिशु पूरे 9 महीने तक मां के गर्भ में होता है इन पूरे 9 महीने को 3 3 के महीने के 3 माह में बांट दिया जाता है अर्थात पहले से तीसरे महीने को पहली तिमाही, चौथी से छठे महीने को दूसरी तिमाही और सातवें से नौवें महीने को तीसरी तिमाही कहा जाता है। इन सभी तीन बाहों में भ्रूण का विकास अलग-अलग होता है।

  • महिलाओं में गर्भ ठहरने की साथ साथ ही भ्रूण का विकास होना शुरू हो जाता है। और पूरे 9 महीने तक गर्भ में उसका विकास निरंतर चलता रहता है। 
  • महिलाओं में गर्भावस्था का समय डॉक्टर पिछले महीने में आई माहवारी की तारीख से ही गिनना शुरू करते हैं। अर्थात जब तक महिलाओं को अपने गर्भवती होने का पता चलता है। तब तक उनके गर्भ में पल रहा शिशु एक महीना पूरा कर लेता है। और धीरे-धीरे उसका आकार बढ़ने लगता है।
  • डॉक्टर महिला के सोनोग्राफी करके बच्चे की धड़कन का पता लगाते हैं। बच्चे में धड़कन 6 से 7 वे सप्ताह में आ जाती है।
  • जिन महिलाओं के गर्भ में कोई समस्या होती है। तो उसका पता भी लगाया जा सकता है। 
  • बच्चे का विकास सही तरीके से हो रहा है या नहीं इसका पता भी शुरुआती दिनों में सोनोग्राफी करके पता लगाया जाता है।
  • सोनोग्राफी की सहायता से गर्भ में शिशु एक है या दो उसका भी पता लगाया जाता है।
  • 3 महीने की गर्भावस्था में बच्चे के लिंग का भी निर्माण हो जाता है।
  • बच्चे के मस्तिष्क का निर्माण भी शुरू हो जाता है। और वह 9 महीने तक निरंतर चलता रहता है।
  • 3 महीने पश्चात महिलाओं का गर्भाशय बढ़ने लगता है। जो उनके पेट बढ़ने से दिखाई देता है।
  • मां की गर्भाशय में बच्चा एक पानी की थैली के अंदर होता है। जिसमें वह सांस लेता है। उसी पानी को पीने लगता है। घूमने लगता है। गर्भाशय के अंदर यह पानी की थैली मैं भरा हुआ द्रव्य पदार्थ एम्नोटिक फियूलड कहलाता है।
  • चौथे महीने से महिलाओं को उल्टी जी मचलाना आदि की समस्या से निजात मिलने लगती है। और खाने-पीने के प्रति भी रुचि होने लगती है।
  • जैसे-जैसे महिलाओं का गर्भाशय बढ़ने लगता है तो वह मूत्राशय से दबाव डालने लगता है। जिससे महिलाओं को बार बार पेशाब जाने की जरूरत पड़ती है।
  • गर्भावस्था में महिलाओं को किसी भी प्रकार का तनाव नहीं लेना चाहिए। क्योंकि यह गर्भ में पल रहे शिशु के लिए खतरा हो सकता है। 
  • महिलाओं को हमेशा खुश रहना चाहिए और सकारात्मक सोच रखनी चाहिए।
  • 19 से 25 हफ्तों में बच्चे की हलचल मां को महसूस होने लगती है। कभी-कभी बच्चे का जोर से लात मारना भी मां को महसूस होता है। यह समय उसके लिए बड़ा ही खुशी देने वाला और उत्सुकता वाला होता है।
  • इन्ही हफ्तों में बच्चे की सुनने की क्षमता भी विकसित हो जाती है। वह अपने आसपास होने वाली आवाजों को पहचानने लगता है।
  • इस समय बच्चे के फेफड़ों का विकास में निरंतर चलता है। और वह मां के अंदर ही सांस लेने का अभ्यास शुरू कर लेता है।
  • 26 से 28 हफ्तों में गर्भ के अंदर बच्चा अपनी आंखें भी खोल लेता है।
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  • 7 महीने से नौवें महीने तक बच्चे का वजन गर्भ के अंदर बहुत तेजी से बढ़ता है। इसलिए महिलाओं को कई तरह की समस्या भी होने लगती है, जैसे- उठने बैठने में तकलीफ होना, पेट में हल्का फुल्का दर्द का अनुभव होना, पैरों पर सूजन आना।
  • इस समय बढ़ते हुए पेट की वजह से महिलाओं को कमर दर्द की भी शिकायत हो सकती है। यह समस्याएं अधिकतर सभी महिलाओं के साथ होती है जो आम बात है।
  • गर्भावस्था में बढ़ती हुई पेट की वजह से पेट पर खुजली और पेट पर स्ट्रेच मार्क के निशान होने लगते हैं। इसलिए इस समय नारियल के तेल की पेट पर मालिश करनी चाहिए। या अन्य कोई भी तेलिय क्रीम की भी मालिश की जा सकती है।
  • गर्भ में शिशु 20 घंटे सोता है।
  • महिलाओं को समय-समय पर गर्भ में शिशु की हलचल का भी ध्यान रखना चाहिए। अगर शिशु कम हलचल कर रहा है, या नहीं कर रहा है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
  • जन्म के समय शिशु का वजन 3 से 4 किलो तक होना चाहिए।

महिलाओं को गर्भावस्था के समय ध्यान रखने वाली बातें।

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गर्भावस्था के समय महिलाओं के लिए बहुत ही ध्यान रखने वाला होता है। इस समय कई ऐसी बातें होती है, जिनका ध्यान रखना बेहद जरूरी है। नहीं तो कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

  1. शुरू के 3 महीनों में महिलाओं को अपना खास तौर से ध्यान रखना चाहिए। इस समय गर्भपात होने का खतरा होता है। इस समय महिलाओं को भारी सामान उठाने से बचना चाहिए। और कुछ जोर लगाने वाले काम भी नहीं करनी चाहिए।
  2. इस समय ज्यादा गर्म करने वाली चीजें भी नहीं खानी चाहिए। और कुछ हेवी एक्सरसाइज से भी बचना चाहिए।
  3. इस समय महिलाओं को अपने खाने पीने का सही तरीके से ध्यान रखना चाहिए। उन्हें पोष्टिक भोजन और संतुलित भोजन करना चाहिए। भोजन को एक बार में न कर कर थोड़ा थोड़ा बार-बार खाना चाहिए।
  4. महिलाओं को गर्भावस्था में एक से चौथाई हिस्सा ज्यादा खाना खाना चाहिए।
  5. पानी भी ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पीना चाहिए।
  6. डॉक्टर इस समय कई तरह के टेस्ट भी करते हैं। इसलिए समय-समय पर आपको डॉक्टर के पास जाते रहना चाहिए।
  7. डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों को भी समय पर लेना चाहिए।
  8. काम के बीच बीच में आराम भी करते रहना चाहिए।
  9. महिलाओं का 4 महीने बाद हर महीने एक 1 से 2 किलो वजन बढ़ना चाहिए।
  10. गर्भावस्था में महिलाओं को उल्टे हाथ की तरफ करवट लेकर सोना चाहिए। क्योंकि इस तरफ सोने से बच्चे में ब्लड सरकुलेशन अच्छे से होता है। और बच्चे का विकास भी अच्छे से होता है।
  11. गर्भावस्था में सभी प्रकार की हरी सब्जियां फल अन्य सब्जियां का सेवन अच्छे से करना चाहिए। क्योंकि इस समय महिला को सभी प्रकार के विटामिंस मिलना जरूरी हैं। 
  12. इस समय कैल्शियम, आयरन आदि कई तरह के मिनरल्स शरीर के लिए आवश्यक होते हैं। यह बच्चे में सभी प्रकार की कमी को दूर करते हैं।
  13. गर्भवती महिलाओं को दूध, दही, छाछ आदि। और दूध से बनी अन्य वस्तुओं का भी सेवन अधिक से अधिक करना चाहिए।
  14. इस समय महिलाओं को सभी प्रकार की दालों का सेवन करना चाहिए। क्योंकि इनमें अधिक मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है।
  15. महिलाओं को सूखे मेवे जैसे बदाम अंजीर किशमिश आदि सेवन करना चाहिए।
  16. महिलाओं को गर्भावस्था के समय कुछ व्यायाम करने चाहिए और 30 मिनट रोज टहलना चाहिए।
  17. इस समय महिलाओं को सुरक्षित वातावरण और ताजी हवा में सांस लेनी चाहिए यह उसके लिए बहुत लाभदायक है।

गर्भावस्था में किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

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गर्भावस्था के समय कई ऐसी वस्तुएं होती हैं। जिनका सेवन करने से कई तरह की समस्याएं और गर्भपात के खतरे को बढ़ाती है। इसलिए इस समय कुछ चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

  • महिलाओं को गर्भावस्था में पपीता और अनानास का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह दोनों गर्भपात के खतरे को बढ़ाते हैं।
  • इस समय कैफीन का सेवन भी नहीं करना चाहिए। अर्थात चाय, कॉफी या किसी तरह के सॉफ्ट ड्रिंक्स, कोला आदि नहीं लेनी चाहिए।
  • कच्चे मास या अंडा का भी सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि बिना पके हुए या कम पके हुए अंडे मांस में बैक्टीरिया होते हैं। जो गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए हानिकारक होते हैं।
  • दूध भी अच्छे से उबला हुआ होना चाहिए।

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इस प्रकार हमने जाना कि गर्भावस्था में महिलाओं को बातों का खासतौर पर ध्यान रखने की जरूरत है। गर्भावस्था में भ्रूण का विकास किस तरह होता है। गर्भावस्था में महिलाओं को किन चीजों का सेवन करना चाहिए और किन चीजों का नहीं। इस विषय को ध्यान में रखकर महिलाएं अपनी गर्भावस्था की यात्रा को और सुखमय बना सकती है। दोस्तों, हमारे इस लेख के माध्यम से महिलाएं अपनी गर्भावस्था से जुड़ी विशेष बातों कि सावधानी रख सकती है। दोस्तों, गर्भावस्था से जुड़ी अन्य और जानकारी जानने के लिए आप हमें कमेंट कर सकते हैं। यह लेख आपको कैसा लगा यह भी हमें कमेंट करके जरूर बताएं। हमारे इस लेख को पढ़ने के लिए धन्यवाद!

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